महान गुरु | Akbar Birbal Story in Hindi | Akbar और Birbal ki Kahani

Har mushkil ka hal Akbar Birbal , ये जुमला तो अपने जरूर सुना होगा , तो आज इसी Akbar Birbal stories in Hindi का एक और रोमांचक हिस्सा आपके सामने हम लेकर आये  है , उम्मीद  है  कि आपको ये कहानी पसंद आये।

तो चलिए शुरू करते हैं आज की ये कहानी :-

” महान गुरु ” – Akbar Birbal Story in Hindi

 

तो  Akbar Birbal ki Kahani कुछ यूँ  शुरू होती है –

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दौलतराम नाम का एक आदमी गांव में रहता था। वह एक बहुत कंजूस जमीदार था, उसका एक मोहन नाम का बेटा था जो की बहुत शरारती था।

एक दिन जमीदार अपना काम कर रहे थे। जमीदार की पत्नी उनके पास आकर कहती है – अरे, सुनते हो। घर का सारा राशन खत्म हो गया है

आप मुझे ‘एक सोने का सिक्का दे दीजिए।’

यह सुनकर जमीदार चौक जाता है और कहता है – क्या तुम पागल हो गयी हो। तुम्हें सोने का सिक्का चाहिए ! पैसे क्या पेड़ पर उगते है !  जाओ मैं एक रुपया भी नही दूंगा।

पत्नी गुस्से में कहती है – अगर घर मे राशन नही होगा तो आप क्या खायेंगे।

 

( तभी किचन में से कुछ टूटने की आवाज आती है। वे दोनों जल्दी से किचन में जाकर देखते है कि मटका टूटा हुआ पड़ा है )

यह देखकर जमीदार को बहुत गुस्सा आता है और अपने बेटे से कहता है – तू पूरे दिन शरारत करता रहता है। कुछ न कुछ तोड़ता रहता है।

चला जा यहाँ से …

जमीदार अपनी पत्नी से कहता है – तुम इसे समझाती क्यों नही हो। कल भी इसने एक मेज तोड़ दी थी। मैं इतना पैसा कहां से लेकर आऊँगा। ये एक दिन मुझे डुबा कर रहेगा।

पत्नी कहती है – मैने आपसे कितनी बार कहा है कि मोहन के लिए “एक गुरु” लेकर आइये। उसे कोई पढ़ाने और सुधारने वाला होना चाहिये।

वरना वह और भी ज्यादा बिगड़ जाएगा। आप बीरबल के पास जाइये। उनकी नज़र में कोई ‘गुरु’जरूर होगा।

 

यह सुनकर जमीदार बीरबल के पास जाते है और कहते है – आदाब हुज़ूर।

मेरा एक बेटा है। वह बहुत शरारती है। आप एक ऐसा गुरु बताइये जो मेरे बेटे को पढ़ाये और सुधार सके।

बीरबल कहते है – तुम चिंता मत करो। मेरी नज़र में एक ” शास्त्री ” नाम के गुरु है। जो तुम्हारे बेटे को पढ़ाएंगे। मैं कल तुम्हारे घर पर उन्हें भेज दूँगा।

अगले दिन गुरु जी जमीदार के घर पर आते है। जमीदार उन्हें अपने बेटे से मिलवाते है और कहते है – गुरु जी, मेरा बेटा बहुत शरारती है। अब आज से यह आपकी जिम्मेदारी है।

कृपया करके आप मेरे बेटे को सुधार दीजिये।

इसके बदले, मैं आपको हर महीने ‘तीन सोने की मोहरे’ दूँगा और अब तो आप यहीं रहोगे तो खाना पीना भी आपका यहीं पर होगा।

शास्त्री गुरु कहते है – आप चिंता मत कीजिये। कुछ महीनों में आपका बेटा बिल्कुल सुधर जाएगा।

 

( चार महीने बीत जाते है। जमीदार का बेटा बहुत सुधर जाता है )

एक दिन मोहन पढ़ रहा होता है यह देखकर जमीदार और उसकी पत्नी कहते है – देखिये, हमारा बेटा कितना समझदार हो गया है। लेकिन आपने अभी तक गुरुजी को दक्षिणा क्यों नही दी ?

जमीदार कहता है – चार महीनों से वह हमारे घर पर रोज खाना खाता आ रहा है। पैसे तो उसे हमे देने चाहिये। मैं उसे पैसे नही दूँगा।

अगले दिन शास्त्री गुरु जी बीरबल के घर पर जाते है और कहते है – बीरबल , जमीदार के बेटे को मैंने चार महीनों तक पढ़ाया, लेकिन जमीदार ने अभी तक मुझे दक्षिणा नही दी है।

मैने उनसे कई बार पैसे मांगे लेकिन वह कहते है, कि मेरा खाना मेरी दक्षिणा से भी ज्यादा है। मुझे तो उनका शुक्रगुजार होना चाहिए।

बीरबल कहते है, उनका बेटा कैसा है।

उनका बेटा तो बिल्कुल सुधर गया है।

बीरबल – तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारी दक्षिणा दिलवाकर रहूँगा।

 

महान गुरु – Akbar Birbal Stories in Hindi

अगले दिन बीरबल जमीदार के घर पर जाते है और कहते है – कैसे हो जमीदार और तुम्हारा बेटा कैसा है।

जमीदार – हुज़ूर, अब तो वह बहुत सुधर गया है।

बीरबल – पर तुमने गुरुजी को दक्षिणा क्यों नही दी।

जमीदार कहता है – हुज़ूर, गुरुजी दक्षिणा से ज्यादा तो मेरा खाना खा जाते थे। फिर मैं उनको किस बात के पैसे दूं।

बीरबल कहते है – तुम्हें उनकी दक्षिणा दे देनी चाहिये।

मैं एक महान गुरु को जानता हूँ जिससे आपको ना तो कोई दक्षिणा देनी होगी और ना ही खाना खिलाना होगा।

यह सुनकर जमीदार बहुत खुश हो जाता है और कहता है – क्या कह रहे है आप ! क्या आप ऐसे गुरु को जानते है , जो एक भी पैसा नही लेंगे।

ठीक है , आप जल्दी से उनको यहाँ पर भेज दीजिये।

बीरबल – ठीक है, कल मैं उनको आपके घर पर लेकर आऊँगा।

 

( अगले दिन बीरबल गुरुजी को लेकर जमीदार के घर पर जाते है )

उन्हें देखकर जमीदार चौक जाता है और कहता है – ये क्या है बीरबल, ये तो एक मूर्ति है। ये क्या  मेरे बेटे को पढ़ाएंगे।

बीरबल कहते है – यह ‘ गौतम बुद्ध की मूर्ति है। ‘ दुनिया के सबसे बड़े गुरु है। ये मूर्ति ना तो आपसे पैसा लेगी और ना ही आपका खाना खाएगी।

जमीदार को सब कुछ समझ आ जाता है और बीरबल से कहता है – मुझे माफ़ कर दीजिये हुज़ूर, मैं गुरुजी को दक्षिणा दे दूंगा।

 

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( Akbar Birbal Story in Hindi )

 

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( Moral story in Hindi )

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