साजिश का पर्दाफाश Akbar Birbal Story in Hindi | Akbar Birbal Stories For Kids

Akbar Birbal ki kahani in Hindi , आज इसी Akbar Birbal stories in Hindi का एक और रोमांचक हिस्सा आपके सामने हम लेकर आये  है , उम्मीद  है  कि आपको ये कहानी पसंद आये।

तो चलिए शुरू करते हैं आज की ये कहानी :-

 

साजिश का पर्दाफाश ” – Akbar Birbal Story in Hindi

तो  Akbar Birbal story कुछ यूँ  शुरू होती है –

एक दिन अकबर अपने बालो को कंघी कर रहे थे। तभी अकबर सोचते है कि हमारे बाल बहुत लंबे हो गए है। कल हम एक नाईं को बुलाकर अपने बाल कटवाएंगे।

अगले दिन राजमहल में नाई आता है और अकबर के बाल काटता है। नाई बाल काटते हए, अकबर से कहता है – जहाँपनाह, आप बहुत अच्छे राजा हो। आप अपनी प्रजा का बहुत खयाल रखते हो। लेकिन…..

लेकिन क्या, तुम क्या कहना चाहते हो?  क्या हम किसी को नजरअंदाज कर रहे है?

sajish-ka-parda-fash Akbar Birbal Story in Hindi
Copyright : Moral story in Hindi

 

नाई कहता है – जहाँपनाह, आप अपनी प्रजा का बहुत खयाल रखते हो। लेकिन क्या आपने कभी अपने पूर्वजों के बारे में सोचा है कि स्वर्ग में आपके पूर्वज कैसे होंगे। उनको किसी चीज की जरूरत तो नही है।

अकबर कहते है – वे तो स्वर्ग जा चुके है और हमे कैसे मालूम पड़ेगा कि उनको किस चीज की जरूरत है। हम अपने पूर्वजों का ख्याल रखते है।

उनकी रूह की सुकून के लिए दुआएँ करते है। उनकी याद में हमने शाही मकबरे बनवाये है।

 

नाई कहता है – मुझे माफ कीजिये जहाँपनाह, मेरा मकसद आपको परेशान करने का नही था। क्या आपने कभी सोचा है कि स्वर्ग में आपके पूर्वज कैसे होंगे।
अकबर कहते है – क्या तुम वेवकूफ हो। भला कोई स्वर्ग कैसे जाकर आ सकता है।

तब नाईं कहता है जहाँपनाह, मैने एक सिद्ध बाबा के बारे में सुना है। जो किसी को भी स्वर्ग भेजकर वापस बुला सकते है।

शकील उनके भक्त है। उन्हें बुलाकर आप सिद्ध बाबा के बारे में पूछ सकते है।

अकबर नाई से कहते है – कल उन्हें बुलाकर दरबार मे पेश किया जाए।

 

( अगले दिन अकबर – शकील, नाई और सिद्ध बाबा से मिलते है )

अकबर, बाबा से पूछते है क्या ये सच है, कि तुम किसी को भी स्वर्ग भेज सकते हो?

बाबा कहते है – मैं तो सिर्फ ईश्वर का भक्त हूँ, अगर कोई स्वर्ग जाकर वापस आना चाहे तो यह ‘अवश्य’ सम्भव है।

यह सुनकर सब चौक जाते है। लेकिन स्वर्ग के सुखों को छोड़कर बहुत कम लोग वापस आते है।

अकबर, सिद्ध बाबा से कहते है – हम देखना चाहते है कि स्वर्ग में हमारे पूर्वजो को कोई परेशानी तो नही है।

 

सिद्ध बाबा कहते है – महाराज, आपको किसी ऐसे व्यक्ति को भेजना होगा। जिस पर आपको विश्वास हो। जो वापस आकर आपको स्वर्ग के बारे में बता सके।

तभी शकील कहते है – जहाँपनाह, आप बीरबल को भेज दीजिये। इस सभा मे सिर्फ बीरबल पर ही विश्वास कर सकते है और बीरबल स्वर्ग के सुखो की परवाह न करते हुए जरूर वापस आएंगे।

अकबर कहते है – बीरबल, क्या आप हमारे लिए स्वर्ग जा सकते है ?

बीरबल कहते है – ‘हाँ’ जहाँपनाह! मैं स्वर्ग जा सकता हूँ।

 

बीरबल, सिद्ध बाबा से पूछते है – योगी जी, ये यात्रा कब शुरू करनी है और मुझे वहाँ पर कितना समय लगेगा।

सिद्ध बाबा कहते है – यह विधि दरबार के बगीचे में होगी। मैं एक पवित्र अग्नि जलाऊँगा, उसमे तुम्हें प्रवेश करना है। तब मैं तुम्हारे लिए स्वर्ग का द्वार खोल दूंगा।

तुम चाहो तो दो महीने बाद वापस आ सकते हो।

बीरबल कहते है – जहाँपनाह, आप मुझे चार-पांच दिनों का समय दे दीजिए। क्योंकि मैं काफी समय तक बाहर रहूंगा तो कुछ कामो को निपटा देता हूँ।

 

( पांच दिन बाद सब लोग बगीचे में इकट्ठे होते है )

लकड़ियों में आग जला कर बीरबल को अग्नि के पास खड़ा किया जाता है।

सिद्ध बाबा जी कहते है, कि अब बीरबल स्वर्ग जा चुके है अगर वह स्वर्ग के सुख के जाल में ना फसे तो वह दो महीने बाद आ जाएंगे।

एक दिन अकबर, दरबार मे बहुत उदास बैठे होते है और कहते है, दो महीने बीत गए है। बीरबल अभी तक वापस नही आये है। हमे बीरबल की बहुत याद आ रही है।

शकील कहते है – जहाँपनाह, स्वर्ग के सुखों को छोड़कर बहुत कम लोग वापस आते है। आप चिंता मत कीजिये, जहाँपनाह! बीरबल जरूर वापस आएंगे।

 

Akbar Birbal Stories – Akbar Birbal Stories For Kids

तभी सामने से एक आदमी आता है। उसकी लम्बे बाल और बड़ी – बड़ी दाढ़ी होती है। दरबार मे उसे कोई पहचान नही पाता है।

अकबर उस आदमी से कहते है – कौन है आप? कहाँ से आये है।

वह आदमी कहता है – आदाब जहाँपनाह! कैसे है आप, क्या आपने हमे पहचान नही? ‘हम बीरबल है।’

सब लोग बीरबल को देखकर चौक जाते है।

अकबर कहते है – कैसे हो बीरबल? कैसे रही तुम्हारी यात्रा।

बीरबल कहते है – महाराज, मैं स्वर्ग में सभी पूर्वजों से मिलकर आया हूँ। सभी लोग बहुत खुश है। सिद्ध बाबा ने सच कहा था, वास्तव में स्वर्ग के सुखों को छोड़कर वापस आना मुश्किल है।

अकबर कहते है – बीरबल, तुमने अपने बाल इतने लंबे क्यों कर लिए है ?

 

जहाँपनाह, स्वर्ग में आपके पूर्वजों को किसी भी प्रकार की कोई कमी नही है। वे लोग वहाँ पर बहुत खुश है।

लेकिन पूर्वजों की आपसे एक विनती है कि स्वर्ग में ‘नाई ना होने के कारण‘ वहाँ पर सभी के बाल लंबे हो गये है । कृपया आप यहाँ का एक नाई स्वर्ग भेज दीजिये।

तभी अकबर, सिद्ध बाबा और नाई को बुलाकर कहते है कि अच्छा हुआ, हमारे नाई ने हमें सुझाव दिया कि, हमें किसी को स्वर्ग भेजना चाहिए।

स्वर्ग में हमारे पूर्वजों को एक नाई की जरूरत है।

सिद्ध बाबा कल आप एक पवित्र अग्नि की व्यवस्था करके रखियेगा। कल हम अपने नाई को स्वर्ग भेजेंगे।

 

यह सुनकर नाई अपने पैरों पर बैठकर माफी मांगता है और कहता है – जहाँपनाह, मुझे माफ कर दीजिए! मुझसे गलती हुई है।

सिद्ध बाबा एक पाखंडी है। यह सब मैंने शकील के कहने पर किया था। क्योंकि शकील, बीरबल की शोहरत से जलता है।

नाई रोकर कहता है जहाँपनाह, मैं इतनी जल्दी नहीं मरना चाहता, अगर मुझे जलती चिता पर लिटाया गया तो, मैं मर जाऊंगा। मुझे नहीं मालूम कि, बीरबल स्वर्ग से कैसे वापस आए।

यह सुनकर अकबर को बहुत गुस्सा आता है वे तीनों को जेल में बंद करा देते हैं और बीरबल से पूछते हैं कि, तुमने यह सब कैसे किया?

 

अकबर कहते है :-

जहाँपनाह, जब सिद्ध बाबा पहली बार दरबार में आए थे, और स्वर्ग में जाने की बात कर रहे थे, तभी मुझे शक हो गया था, कुछ तो गड़बड़ है, इसीलिए मैंने आपसे 5 दिनों की मोहलत मांगी।

इन 5 दिनों में मैंने एक सुरंग खुदवाई। यह सुरंग मैंने उस जगह पर खुदवाई जहाँ पर पवित्र अग्नि जलने वाली थी। जो सीधे मेरे घर के लिए जाती थी।

जैसे ही मैं चिता के पास पहुँचा, तो मैं ठीक चिता के पीछे उसी जगह पर खड़ा हो गया, जहाँ पर सुरंग का गुप्त दरवाजा था। जैसे ही चिता में अग्नि जलाई, मैं पीछे से सुरंग से निकल गया और सीधे अपने घर पहुँच गया।

 

मैं इन तीनो की साजिश का पर्दाफाश करना चाहता था। इसीलिए मैंने इन तीनो में से नाईं को चुना, क्योंकि नाईं इन तीनों में सबसे कमजोर था।

इसलिए मैंने अपने बाल लंबे किये औऱ दो महीने बाद वापस आया।

यह सुनकर अकबर बहुत खुश हो जाते है। और कहते है, कि बीरबल तुम बहुत समझदार हो। तुम्हारा कोई जबाव नही।

 

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( Akbar Birbal Story in Hindi )

दोस्तों आपको ये कहानी कैसी लगी Comment में बताईयेगा .

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तो मिलते है एक नयी कहानी में  ( Moral Story in Hindi ) की जुबानी में।

 

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